हम कौन हैं
उत्तराखण्ड क्रांति दल (UKD) केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आत्मा, अस्मिता और स्वाभिमान का जनआंदोलन है
हम उस ऐतिहासिक चेतना के प्रतिनिधि हैं जिसने हिमालय की गोद में बसे इस प्रदेश की पीड़ा को स्वर दिया, उसके संघर्ष को दिशा दी और पृथक उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के लिए दशकों तक निरंतर संघर्ष किया। हमारा जन्म सत्ता की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि उन लाखों पर्वतीय नागरिकों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए हुआ, जिनकी आवाज़ वर्षों तक सत्ता के गलियारों में अनसुनी रही।
26 जुलाई 1979 को स्थापित उत्तराखण्ड क्रांति दल ने उस समय एक ऐसे वैचारिक आंदोलन का नेतृत्व किया, जब पहाड़ विकास की मुख्यधारा से लगातार दूर होता जा रहा था। रोजगार के अभाव में युवाओं का पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, कमजोर आधारभूत संरचना, प्राकृतिक संसाधनों का असंतुलित दोहन तथा स्थानीय संस्कृति और भाषाओं की उपेक्षा ने एक ऐसे राजनीतिक विकल्प की आवश्यकता उत्पन्न की, जो केवल उत्तराखण्ड और उसके लोगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। उत्तराखण्ड क्रांति दल उसी आवश्यकता से जन्मा।
हमारा संघर्ष केवल एक पृथक राज्य की स्थापना तक सीमित नहीं था। हमारा उद्देश्य एक ऐसे उत्तराखण्ड का निर्माण करना था जहाँ विकास की परिभाषा केवल शहरों तक सीमित न हो, बल्कि अंतिम गाँव, अंतिम नागरिक और अंतिम परिवार तक पहुँचे। हमारा विश्वास है कि उत्तराखण्ड का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब उसके प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार उसके लोगों का होगा, जब युवाओं को अपने ही प्रदेश में सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, जब गाँव जीवंत होंगे, जब पलायन रुकेगा और जब विकास हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी के अनुरूप होगा।
हम उत्तराखण्ड को केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं मानते। हमारे लिए यह देवभूमि की आध्यात्मिक विरासत, हिमालय की पर्यावरणीय चेतना, वीर सैनिकों की गौरवशाली परंपरा, किसानों और श्रमिकों के श्रम, महिलाओं के अदम्य साहस, युवाओं की ऊर्जा तथा गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, रं, भोटिया, थारू, बोक्सा और अन्य सभी समुदायों की साझा सांस्कृतिक पहचान का जीवंत स्वरूप है। यही विविधता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और यही हमारी राजनीति की आधारशिला है।
हमारा विश्वास है कि उत्तराखण्ड का विकास दिल्ली, लखनऊ या किसी बाहरी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को समझकर ही संभव है। इसलिए हम ऐसी नीतियों के पक्षधर हैं जो स्थानीय आवश्यकताओं, स्थानीय संसाधनों और स्थानीय जनभागीदारी पर आधारित हों। हमारी राजनीति का केंद्र सत्ता नहीं, बल्कि समाज है; हमारा लक्ष्य शासन नहीं, बल्कि जनसेवा है।
हम पर्यावरण और विकास को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक मानते हैं। हिमालय केवल उत्तराखण्ड की पहचान नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत की जल, जलवायु और पारिस्थितिक सुरक्षा का आधार है। इसलिए हमारा संकल्प है कि विकास की प्रत्येक योजना प्रकृति के संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, वनों के संवर्धन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई जाए।
हम उत्तराखण्ड की सभी लोकभाषाओं, लोककलाओं, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन को अपनी नैतिक एवं राजनीतिक जिम्मेदारी मानते हैं। हमारी दृष्टि में अपनी संस्कृति से जुड़ा समाज ही आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और भविष्य के प्रति आश्वस्त समाज बन सकता है।
उत्तराखण्ड क्रांति दल लोकतंत्र, पारदर्शिता, ईमानदारी, सामाजिक न्याय और उत्तरदायी शासन के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। हमारा विश्वास है कि राजनीति का सर्वोच्च उद्देश्य जनविश्वास अर्जित करना, समाज को सशक्त बनाना और प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
आज, जब उत्तराखण्ड अनेक नई चुनौतियों—बढ़ते पलायन, बेरोज़गारी, पर्यावरणीय संकट, अनियोजित शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक क्षरण—का सामना कर रहा है, तब उत्तराखण्ड क्रांति दल अपने मूल आदर्शों के साथ पुनः प्रतिबद्ध होकर एक ऐसे भविष्य के निर्माण का संकल्प लेता है जहाँ विकास और प्रकृति, आधुनिकता और परंपरा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय एक-दूसरे के पूरक बनें। हम केवल उत्तराखण्ड के इतिहास का हिस्सा नहीं हैं—हम उसके वर्तमान के प्रहरी और उसके भविष्य के निर्माता बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
उत्तराखण्ड क्रांति दल—उत्तराखण्ड की पहचान, उत्तराखण्ड का स्वाभिमान और उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प
जय उत्तराखण्ड